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Movies Review: इस फिल्म को देखने का बाद आपको भारतीय होने का गर्व जरूर होगा :'परमाणु: द स्टोरी ऑफ़ पोखरण',

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Movies Review: इस फिल्म को देखने का बाद आपको भारतीय होने का गर्व जरूर होगा :'परमाणु: द स्टोरी ऑफ़ पोखरण',





स्टार कास्ट: जॉन अब्राहम, डायना पेंटी, बोमन ईरानी आदि।

निर्देशक: अभिषेक शर्मा

निर्माता: जॉन अब्राहम

भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री में ऐतिहासिक घटनाओं पर ऐसी बहुत कम फ़िल्में बनी हैं जो आधिकारिक तौर पर इतिहास पर नज़र डालती हो। कुछ फ़िल्में बंटवारे को लेकर बनी तो कुछ फ़िल्में जातिवाद को लेकर भी बनी। कुछ गिनी-चुनी फ़िल्में जैसे '26/1' या 'ब्लैक फ्राइडे' हैं जो सच्ची घटनाओं पर सिलसिलेवार नज़र डालती हैं, उसी कड़ी को आगे बढ़ाती हुई फ़िल्म है- 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ़ पोखरण'!

भारत के परमाणु विस्फोट को लेकर एक के बाद एक घटनाक्रम को रिपोर्टिंग के अंदाज़ में बयां करने वाली यह फ़िल्म सचमुच सराहनीय है। इन घटनाओं को दर्शाने के लिए कुछ काल्पनिक किरदारों का सहारा ज़रूर लिया गया है लेकिन, वह मात्र घटनाओं को एक धागे में पिरोने के लिए है।

1974 में जब भारत ने अपने पहला परमाणु परीक्षण किया था तो उसके बाद अमेरिका की ओर से कई आर्थिक और राजनीतिक पाबंदी हम पर लगाये थे! इस दौरान सोवियत संघ के विघटन के बाद हमें किसी भी बड़े देश का साथ नहीं मिला था। पाकिस्तान के साथ चीन और कई मायने में अमेरिका भारत की सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय बनता जा रहा था। साथ ही साथ हम फिर से परमाणु परीक्षण ना कर पाये इसके लिए लगातार गुप्त तरीको का सहारा लिया जा रहा था। साथ ही अमेरिकी सैटेलाइट पोखरण क्षेत्र पर लगातार आसमान से नज़र बनाये हुए थे। ऐसे में भारत के लिए परमाणु परीक्षण करना बहोत मुश्किल सा था और सुरक्षा के दृष्टीकोण से परमाणु परीक्षण करना उतना जरूरी भी था!


इस परमाणु परीक्षण को किस ढंग से अंज़ाम दिया गया? किन-किन विपरीत परिस्थितियों में पूरी दुनिया पर  निगाह रखती सैटेलाइट से नज़र बचाकर परमाणु परीक्षण किया गया यही कहानी है फिल्म 'परमाणु...' की। निर्देशक अभिषेक शर्मा ने इस जटिल विषय को बहुत ही सरलता से दर्शाया है  जो एक आम आदमी को ठीक से समझ में आये, और इस अंदाज़ में पेश किया है! जिसमें वह पूरी तरह से सफल भी हुए हैं।

अभिनय की बात की जाये तो जॉन अब्राहम, डायना पेंटी और बाकी के  कलाकारों ने उम्दा प्रदर्सन  दिया है! एक मामले में जॉन अब्राहम की पीठ थपथपानी पड़ेगी कि निर्माता होते हुए भी उन्होंने फ़िल्म में हीरो  बनने की कोशिश नहीं की बल्कि, एक किरदार के तौर पर ही वह पूरी फ़िल्म में बने रहे। और यही इस फ़िल्म की खास बात  भी है क्योंकि, इतनी बड़ी योजना को कोई एक अकेला शख्स अंज़ाम नहीं दे सकता। टीमवर्क के क्या मायने हैं वो इस फ़िल्म में बखूबी दर्शाया गया है। इस फिल्म में कोई हीरो और कोई हीरोइन नहीं है बल्कि एक टीम है जो हमेशा साथ काम करती है

'परमाणु: द स्टोरी ऑफ़ पोखरण' एक बेहतरीन फ़िल्म है। अगर आपने पोखरण परीक्षण के बारे में नहीं पढ़ा है या नहीं जाना है तो यह फ़िल्म आपके लिए जानकारियों का भंडार हो सकती  है । सत्य घटनाओं पर आधारित होने के बावजूद भी यह फ़िल्म काफी मजेदार  बन पड़ी है! पूरी फ़िल्म आपको कुर्सी पर दम लगा कर  बैठने पर मजबूर कर देती है और जब आप यह फ़िल्म देख कर बाहर निकलते हैं तो आप को अन्दर से  भारतीय होने पर यकीनन गर्व महसूस होता है!
रेटिंग स्टार   **** 4 मिला है ,आप भी देखने जरूर जाये 







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